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प्रकृति से है प्यार तो, धनौल्टी जाओ इस बार

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पिछले कुछ दिनों में उत्तर भारत के कई शहरों का तापमान 42-44 डिग्री तक पहुंच गया है और दिन के समय बाहर निकलने पर गरम हवा से आमना-सामना होने लगा है। ऐसे में बस एक ही बात मन में आती है कि इस सीजन में कौन से हिल स्टेशन जाएं, ताकि कुछ दिनों के लिए ही सही, झुलसाती गर्मी से राहत मिल सके। इसके लिए अभी से प्लान करना होगा, नहीं तो होटल मिलना कठिन और महंगा हो जाएगा। ऐसे में पहला विचार आता है दिल्ली से करीब और मनोरम हिल स्टेशन नैनीताल और मसूरी का। लेकिन दोनों में ही पर्यटकों की इतनी भीड़भाड़ हो जाती है कि लगता नहीं कि हम किसी हिल स्टेशन में हैं या फिर दिल्ली के करोल बाग मार्केट में। इन दोनों स्थानों पर शरीर को गर्मी से राहत तो जरूर मिलती है, पर मन को शांति नहीं। तो क्यों न इस बार कुछ ऐसा सोचा जाए, जो बहुत दूर भी न हो , वहां भीड़भाड़ भी न हो और यह जेब पर भी बहुत भारी न हो।

ऐसे बहुत से स्थान हैं और उनमें एक है धनौल्टी, जो इन सब कसौटियों पर खरा उतरता है। मसूरी से कुछ ही आगे है धनौल्टी। एक बार यहां जाने पर आप फिर लौट कर आना नहीं चाहेंगे। दिल्ली से धनौल्टी पहुंचने के लिए नई दिल्ली स्टेशन से सुबह 6.50 की शताब्दी एक्सप्रेस जाती है, जो 12.40 पर देहरादून पहुंचा देगी। देहरादून में लंच ब्रेक लीजिए और टैक्सी से दो घंटे के अंदर धनौल्टी पहुंच जाएंगे, जिसका प्राकृतिक सौंदर्य बाहें फैलाए आपकी राह देख रहा है। आप चाहें तो सीधे अपनी कार से जा सकते हैं, मेरठ – रुड़की- हरिद्वार होते हुए 259 किलोमीटर की दूरी पर देहरादून है। सड़क मार्ग में आधे घंटे चाय नाश्ते का ब्रेक लेकर लगभग सात घंटे में देहरादून और वहां से मसूरी को मार्ग में बायीं और पीछे छोड़ते हुए 65 किलोमीटर पर धनौल्टी है। जैसे ही हम धनौल्टी की और बढ़ते हैं मार्ग में देवदार के घने पेड़ और निरंतर गहराती हरियाली मन को उल्लास और आनंद से भर देते हैं। बादलों की आंख-मिचौली, कभी बादलों का अचानक आपके मार्ग को घेर लेना या पूरी घाटी को ही अपनी आगोश में भर लेना, यह सब आपको प्रकृति के साथ एकाकार कर देते हैं।

देखते ही देखते छोटे-छोटे शांत पहाड़ी गावों को पीछे छोड़ते हुए अचानक आ पहुंचते हैं धनौल्टी। यहां के सुंदर, उन्मुक्त वातावरण में मन और शरीर तरोताजा हो जाएगा। समुद्र तल से 7500 फीट की ऊंचाई पर यहां का तापमान गर्मी के मौसम में 21-25 डिग्री के करीब ही होता है, जो सर्दी में एक डिग्री नीचे तक पहुंच जाता है। भीड़भाड़ और धक्का-मुक्की के जीवन से दूर यहां के सरल-सीधे लोग और सुरम्य वातावरण आपको मोह लेगा। यहां के गिने-चुने होटलों में बिल्कुल सड़क से सटा और सुविधाजनक होटल है गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीमवीएन) का धनौल्टी हाइट्स। बड़ा कैंपस, खुला वातावरण, एकदम सड़क के पास, ड्राइवर के लिए सोने का स्थान भी। धनौल्टी हाइट्स बहुत हाई-फाई स्थान नहीं है। धनौल्टी में स्वयं को प्रकृति की गोद में पूरा समर्पित कर दें और यहां के सुहाने मौसम, बादलों में भीग जाने का पूरा आनंद लें। और नहीं, तो बस टैरेस पर कुर्सी खींच कर प्रकृति के निरंतर बदलते मूड्स में खो जाएं। विशेषकर रात के समय टैरेस से आप नीचे सड़क पर रोशनी में जगमगाते मार्केट का अद्भुत नजारा देख सकते हैं, जो बादलों की जादुई लुकाछिपी के बीच कभी धुंधली तो कभी स्पष्ट दिखाई देती है। याद रखिये आप धनौल्टी में हैं – कोई जल्दी नहीं, यहां के नैसर्गिक जीवन का शांत मन से भरपूर आनंद लें।

ईको हट्स- होटल से बाहर आते ही सड़क के दूसरी ओर यहां का एक मुख्य आकर्षण ईको हट्स है। यह सुरुचिपूर्ण रूप से बना है। इसे निरंतर रख-रखाव से संवारा गया है और सौर ऊर्जा से यह प्रकाशित होता है। इसमें बांस से बने कॉटेज हैं, जिनमें सौर ऊर्जा से ही संचारित प्रकाश , टेलीविजन, फोन चार्जर और गरम पानी की सुविधाएं हैं। हर कॉटेज के बाहर बरामदे में बांस की कुर्सियां हैं। सामने सुंदर फूलों की क्यारियां और हरे-भरे लॉन्स में ऊंचे-ऊंचे देवदार के पेड़ हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए स्वादिष्ट चाय, कॉफी, भोजन, नाश्ते के लिए एक छोटी-सी पैंट्री है। बस, लॉन में बैठ जाइए और तुरंत बने गरमा-गरम पकौड़ों और चाय का आनंद लें।
सुरकंडा देवी- एक सैलानी की तरह कुछ किलोमीटर पैदल चलना चाहते हैं, तो निकल पड़िए सड़क मार्ग से छह किलोमीटर दूर सुरकंडा देवी मंदिर। यहां सड़क के दोनों ओर छोटी-छोटी आकर्षक दुकानें हैं, जहां चाय-नाश्ते, मनियारी और अन्य स्थानीय सुंदर कलात्मक वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं। अगर थोड़ी और हिम्मत करें, तो सड़क से सटे प्रवेश द्वार से डेढ़ किलोमीटर ऊपर मां के मंदिर तक अवश्य जाएं, वरना मार्केट में चहलकदमी का ही अपना बहुत आकर्षण है। यहां तक पैदल आएं तो बहुत बढ़िया वरना बीस मिनट में ही गाड़ी से पहुंच सकते हैं।

ईको पार्क- होटल धनौल्टी हाइट्स से एकदम सटा हुआ ईको पार्क है। यह करीब पंद्रह एकड़ में फैला हुआ है। यहां पर खेल-कूद व रोमांच के लिए बर्मा ब्रिज, फ्लाइंग फॉक्स आदि जैसे आकर्षण के साथ खुले स्थान, लंबे घुमावदार रास्ते, दोनों ओर सुंदर फूलों से सजी क्यारियों के साथ और मेडिटेशन स्पॉट्स भी हैं। क्या बच्चे, क्या युवा और क्या वयोवृद्ध। सबके लिए यहां आना एक यादगार अनुभव रहेगा। फोटोग्राफी के शौकीन के लिए यहां विशेषकर बहुत कुछ है। 200 मीटर की दूरी पर एक और ईको पार्क है, इसका भी आनंद आप ले सकते हैं। धनौल्टी में पूरी तरह खो जाने के बाद वापस चलने का समय कब सामने आ खड़ा हो जाता है, यह समझ ही नहीं आता, लेकिन जाना तो होगा ही। किसी जगह से वापसी की यात्रा हमेशा थोड़ी चुपचाप ही होती है, क्योंकि पीछे छूट रहे प्राकृतिक सौंदर्य को हम किसी तरह थामे रखना चाहते हैं। ऐसे में रास्ते के दो अन्य आकर्षण आपके अनमनेपन को थोड़ा काम कर देते हैं।

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