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शरद नहीं…, नीतीश ही चलाएंगे जदयू का ‘तीर’- डॉ. आर. एस. पटेल

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चुनाव आयोग का ऐतिहासिक फैसला, कहा- शरद नहीं, जदयू व तीर के मुखिया नीतीश

वाराणसी।  जदयू परिवार के लिए बड़ी खुशखबरी, चुनाव आयोग ने जदयू के चुनाव चिन्ह तीर पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि चुनाव चिन्ह ‘तीर’ पर शरद यादव का नहीं, बल्कि नीतीश कुमार का हक है। चुनाव आयोग के फैसले के बाद नीतीश गुट में खुशी की लहर है।

जदयू नेता औैर यूपी के युवा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आर. एस. पटेल ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि पार्टी के पक्ष में चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला दिया है और इस फैसले का गुजरात चुनाव पर बड़ा असर पड़ेगा, उन्होंने कहा कि सच्चाई की जीत हुई है यह जदयू परिवार की जीत है और श्री पटेल ने चुनाव आयोग को धन्यवाद देते हुए कहा की यह सच्चाई की जीत है। हमारे सवांददाता से बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष श्री पटेल ने कहा की अब शरद जी अब लालू-लालू गाना गाएंगे। चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुना दिया है। जल्द ही विरोधियो पर और शामत आ सकती है।

इस बिच जदयू के राष्ट्रीय कर्यालय नई दिल्ली स्थित जंतर मंतर में युवा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार एवं जदयू के सैकड़ो कार्यकर्त्ता व पदाधिकारी इस फैसले के उपलक्ष्य में मिठाइयां बांटकर एक दूसरे से अपनी ख़ुशी जाहिर की। संजय कुमार ने कहा की आज सत्य की जीत हुई है और यह हमारे लिए ख़ुशी का पल है। 

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- अब शरद जी चिल्लायेंगे लालू-लालू…

बता दें कि शरद यादव और नीतीश कुमार के गुट ने पार्टी सिंबल पर अपनी-अपनी दावेदारी पेश की थी और फैसला चुनाव आयोग को देना था। चुनाव आयोग के समक्ष जनता दल यूनाइटेड के दोनों (नीतीश और शरद) गुटों के बीच मंगलवार को घंटों सुनवाई चली थी और उसके बाद चुनाव आयोग ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शरद गुट की तरफ से जहां कपिल सिब्बल ने आयोग के सामने पक्ष रखा था, वहीं नीतीश गुट से राकेश द्विवेदी ने इस मामले की वकालत की थी, सोमवार को जहां शरद गुट की तरफ से सुनवाई हुई तो वहीं मंगलवार को नीतीश गुट ने अपना पक्ष चुनाव आयोग के समक्ष रखा था।

सोमवार को घंटों चली इस सुनवाई में शरद गुट इस बात को तो मानने के लिए तैयार हुआ कि जेडीयू के अधिकांश सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य नीतीश कुमार के साथ खड़े हैं, लेकिन वो पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति और राष्ट्रीय परिषद के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं।

बताते चले की चुनाव आयोग के वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के मुताबिक, 23 अप्रैल 2016 को नीतीश कुमार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने अक्टूबर में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की, जिसमें शरद यादव सहित कुल 195 लोगों के नाम शामिल हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय कार्यकारिणी में से 138 लोगों का समर्थन नीतीश कुमार को प्राप्त है, जो कि हलफनामे के साथ चुनाव आयोग को सौंपा गया था।

लेकिन विगत कुछ दिनों से शरद यादव पार्टी की गाइड लाइन से हटकर राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पार्टी के विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे लगातार पार्टी पर कब्ज़ा एवं अपने बेटे सहित परिवार की राजनितिक विरासत बनाने के लिए लालू-लालू चिल्लाते रहे है।

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